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Monday, September 06 2010
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लेख का शीर्षक
मन वाणी में वो शक्ति कहाँ
भये प्रगट कृपाला
गोविन्‍दाष्‍टकम्
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
राम से बड़ा राम का नाम
दर्शन दो घनश्याम नाथ
मन तरपत हरि दर्शन को आज
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे...
पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो ..
घूँघट का पट खोल रे
मंगल मुरत मारुतिनंदन हे बजरंगबली
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
बडी देर भई बडी देर भई, कब लोगे खबर मोरे
आऊँगी आऊँगी मैं अगले बरस फिर आऊँगी
बेगि हरो हनुमान
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां
भये प्रगट कृपाला दीनदयाला
सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय
इक दिन गिरजा शिव से बोली
सुनो सुनो इक कहानी सुनो
नंदलाल गोपाल दया करके
देवा हो देवा गणपति देवा तुमसे बढ़कर
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,
मैं नही माखन खायो
जय जय नारायण नारायण हरी हरी ,
मेरा आपकी कृपा से,सब काम हो राहा है.
तेरे फूलों से भी प्यार
जग में सुन्दर है दो नाम,
आज बिरज में होली रे रसिया
सूरत दीनानाथ से लगी
कन्हैया तुझे आना पड़ेगा आना पड़ेगा
मन तेरा मंदिर
तेरे सदके तू भेज दे बुलावा
ठुमक ठुमक पग दुमक कुँज मधु
मीरा मगन भई
द्वार पे सुदामा करीब आगया है.
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
वो काला इक बासुँरी वाला
सावन की रुत हैं आ जा माँ
श्याम मने चाकर राखो जी
तुम बसी हो कण कण अंदर
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बें
जाना था गंगा पार
दाता एक राम
दुनियाँ चले ना
छम छम नाचे
बस इक बार तु भी आजा ऐ माँ मेरे घर पे..
मेरे तो गिरिधर गोपाल
तेरा रामजी करेगे
 
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